नंदा देवी बड़ी जात यात्रा पर नया विवाद: आखिरी गांव वांण में एंट्री को लेकर प्रशासन और समिति आमने-सामने, जानें इनसाइड स्टोरी

ग्राम प्रधान की शिकायत पर प्रशासन ने दी कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी; आयोजन समिति अध्यक्ष कर्नल रावत बोले— श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी, यात्रा में अड़ंगा डालने की हो रही साजिश।
खबर की बड़ी बातें (Key Highlights):
- प्रशासनिक चेतावनी: वांण गांव की प्रधान नंदुली देवी की शिकायत पर चमोली डीएम गौरव कुमार ने बड़ी जात समिति को भेजा चेतावनी पत्र।
- विवाद की वजह: अंतिम गांव वांण में तीन डोलियों और भारी भीड़ के पहुंचने से शांति व्यवस्था और अव्यवस्था फैलने की आशंका जताई गई।
- समिति का 3 पन्नों का पलटवार: आयोजन समिति अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने डीएम को पत्र भेजकर यात्रा में बाधा डालने वालों की जांच की मांग की।
- लाटू देवता का हवाला: समिति ने कहा— वांण में नंदा देवी के धर्मभाई लाटू देवता का पौराणिक मंदिर है, वहां जाने से रोकना आस्था पर चोट।
- प्रशासन का जिम्मा: कर्नल रावत बोले— दुर्गम पड़ावों पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षा मुहैया कराना शासन-प्रशासन का दायित्व।
थराली / चमोली: सिद्धपीठ कुरुड़ से कैलाश धाम के लिए मां नंदा राजराजेश्वरी की तीन देव डोलियों के प्रस्थान के चार दिन बाद भी बड़ी जात यात्रा को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। यात्रा मार्ग के अंतिम आबादी वाले गांव 'वांण' में डोलियों और श्रद्धालुओं के पहुंचने से संभावित अव्यवस्था व कानून-व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
वांण की ग्राम प्रधान की शिकायत का संज्ञान लेते हुए चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने आयोजन समिति को चेतावनी पत्र जारी किया है। इसके जवाब में बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने प्रशासन को 3 पन्नों का विस्तृत पत्र भेजकर तीखा पलटवार किया है और यात्रा रोकने की साजिश का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
प्रधान की शिकायत पर DM की दो टूक: कानून-व्यवस्था बिगड़ी तो तय होगी जिम्मेदारी
जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने नायब तहसीलदार नंदानगर (घाट) के माध्यम से आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को पत्र भेजा। पत्र में वांण गांव की ग्राम प्रधान नंदुली देवी द्वारा दी गई शिकायत का हवाला दिया गया।
शिकायत में कहा गया था कि बड़ी जात के दौरान मां राजराजेश्वरी की मुख्य डोली के साथ अन्य डोलियों और हजारों श्रद्धालुओं के वांण पहुंचने पर गांव में भारी अव्यवस्था और शांति व्यवस्था भंग हो सकती है। डीएम ने पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए कि:
आयोजन समिति ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के साथ तत्काल बैठकर आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकाले।
यात्रा के दौरान यदि शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, तो समिति का उत्तरदायित्व तय कर नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
समिति का आरोप: यात्रा में जानबूझकर अड़ंगा लगाने का षड्यंत्र
डीएम के पत्र का जवाब देते हुए समिति अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को तीन पेज का विस्तृत पत्र जिला प्रशासन को भेजा। उन्होंने कहा कि बड़ी जात का आयोजन कई महीने पहले सिद्धपीठ कुरुड़ के पुजारियों, डोली और मंदिर समिति की पूर्ण सहमति से विधिवत तय किया गया था।
कर्नल रावत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गौड़ पुजारियों का एक गुट, जो राजजात समिति नौटी से भी जुड़ा है, इस पावन यात्रा में जानबूझकर व्यवधान डालने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी कार्ययोजना बताते हुए प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि समिति ने हमेशा शासन-प्रशासन और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय बनाकर काम करने की पहल की है।
'वांण में लाटू देवता का मंदिर, प्रवेश रोकना धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़'
कर्नल रावत ने धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा कि वांण गांव में मां नंदा देवी के धर्मभाई लाटू देवता का पौराणिक मंदिर स्थित है। यह स्थान देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। ऐसे में मां नंदा की डोली और भक्तों के वांण प्रवेश पर आपत्ति जताना सीधे तौर पर जनभावनाओं और धार्मिक आस्था को आहत करना है।
'दुर्गम पड़ावों पर सुविधाएं जुटाना प्रशासन का काम'
समिति ने प्रशासन को याद दिलाया कि किसी भी बड़ी धार्मिक यात्रा में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और श्रद्धालुओं को पीने का पानी, स्वास्थ्य व सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं देना शासन-प्रशासन का दायित्व है।
समिति ने मांग की कि वांण से आगे होमकुंड तक के बेहद कठिन, निर्जन और बर्फीले पड़ावों पर प्रशासन समय रहते सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करे। कर्नल रावत ने कहा कि वे प्रशासन के साथ बातचीत और समन्वय के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि डोलियों के आगे बढ़ने के साथ प्रशासन होमकुंड तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को कैसे संभालता है।
