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उत्तराखंड में 1 दिसंबर से शुरू होगा जनगणना का महाअभियान: 10-20% बढ़ेंगे ब्लॉक और कार्मिक, 1.27 करोड़ जनता की होगी गिनती

9 September 2026

AI News Reader

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उत्तराखंड में 1 दिसंबर से शुरू होगा जनगणना का महाअभियान: 10-20% बढ़ेंगे ब्लॉक और कार्मिक, 1.27 करोड़ जनता की होगी गिनती

देहरादून: देशभर में आबादी की गणना का मुख्य चरण फरवरी 2027 में प्रस्तावित है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनावों के चलते उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा में यह प्रक्रिया तय समय से पहले शुरू होने जा रही है। भारत सरकार द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, इन चार राज्यों में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक जनसंख्या की गणना की जाएगी।

आम जनता की सुविधा के लिए घर-घर गणना शुरू होने से 15 दिन पहले यानी 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे लोग स्वयं पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

35 दिनों तक चलेगा अभियान, 35 हजार कार्मिक होंगे तैनात

जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि विधानसभा चुनावों को देखते हुए इन चार राज्यों में गणना पहले पूरी की जा रही है।

  • पहला चरण (स्व-गणना): 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक नागरिक खुद अपनी गणना कर सकेंगे।
  • दूसरा चरण (घर-घर गणना): 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक (35 दिनों में) प्रगणक घर-घर जाकर प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी जुटाएंगे।
  • रिवीज़नल राउंड: 5 जनवरी से 9 जनवरी 2027 के बीच प्रगणक दोबारा परिवारों की पुष्टि करेंगे कि इस अवधि में किसी सदस्य की संख्या घटी या बढ़ी तो नहीं। 4 और 5 जनवरी की मध्यरात्रि (00:00 बजे) को जनगणना की संदर्भ तिथि (Census Moment) माना जाएगा।

इस महाअभियान के लिए उत्तराखंड में प्रगणक, सुपरवाइजर और रिजर्व कर्मियों को मिलाकर करीब 35,000 कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। कर्मियों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण 15 से 20 अक्टूबर के बीच शुरू होगा।

15 सालों में 26 लाख बढ़ी आबादी, पहुंचे 1.27 करोड़ के पार

उत्तराखंड में 25 अप्रैल से 24 मई 2026 के बीच मकान सूचीकरण (House Listing) का कार्य पूरा हो चुका है। आंकड़ों के अनुसार:

  • प्रदेश की कुल अनुमानित आबादी अब 1.27 करोड़ के पार पहुंच गई है, जो 2011 में 1.01 करोड़ थी (लगभग 26 लाख की वृद्धि)।
  • परिवारों की संख्या 8.18 लाख बढ़कर 28.3 लाख के पार हो गई है।
  • प्रदेश में आवासीय व गैर-आवासीय मकानों की संख्या बढ़कर 45 लाख हो चुकी है।
  • चार जिलों के हिम-आच्छादित (स्नोबाउंड) 131 गांवों व 3 शहरों में गणना का काम 1 सितंबर से 30 सितंबर तक संपन्न किया जा रहा है।
अब पूछे जाएंगे 40 सवाल, लगेगा 45 मिनट से 1 घंटे का समय

निदेशक के मुताबिक, पहले जनगणना में 33 सवाल पूछे जाते थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 40 सवाल कर दिया गया है। सवालों की संख्या बढ़ने के कारण प्रति परिवार औसतन 45 मिनट से 1 घंटे तक का समय लग सकता है। इसी वजह से गणना की अवधि को 20 दिन से बढ़ाकर 35 दिन किया गया है।

प्रमुख सवाल जो पूछे जाएंगे:

  • व्यक्ति का नाम, लिंग, जन्मतिथि व मुखिया से संबंध
  • वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय उम्र और जीवनसाथी का नाम
  • धर्म, जाति (SC/ST) और मातृभाषा
  • माता-पिता का नाम, उम्र और जन्म स्थान का विवरण
  • दिव्यांगता और डिजिटल साक्षरता स्तर (ईमेल आदि का ज्ञान)
  • शिक्षा का स्तर, विषय और शैक्षणिक स्थिति
  • रोजगार, व्यवसाय की प्रकृति, कार्यस्थल की दूरी व आने-जाने का समय
  • प्रवास का कारण और स्थायी आवासीय पता
  • जीवित बच्चों की संख्या संबंधी विवरण
  • कोविड-19 टीकाकरण का स्थान, बैंक खाते
  • वैकल्पिक दस्तावेज: आधार, मोबाइल नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट व ड्राइविंग लाइसेंस।

सैन्य और अर्धसैनिक बलों की अलग व्यवस्था

  • सैनिकों और अर्धसैनिक बलों (BRO, ITBP, SSB आदि) की गणना सुरक्षा कारणों से अत्यंत गोपनीय तरीके से होगी।
  • इनकी गणना डिजिटल ऐप से न होकर ऑफलाइन माध्यम से होगी।
  • इसके लिए संबंधित बलों के चार्ज अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे और डेटा को पूरी सुरक्षा के साथ सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
  • छावनी क्षेत्रों (कैंटोनमेंट बोर्ड) के मुख्य अधिशासी अधिकारी (CEO) चार्ज अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।