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ऋषि पंचमी कब? जानिए इस दिन क्यों नहीं खाया जाता हल से जुता हुआ अन्न, क्या है इसके पीछे की पौराणिक मान्यता

1 September 2026

AI News Reader

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ऋषि पंचमी कब? जानिए इस दिन क्यों नहीं खाया जाता हल से जुता हुआ अन्न, क्या है इसके पीछे की पौराणिक मान्यता

मुख्य बिंदु:

  • भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को रखा जाता है ऋषि पंचमी का पावन व्रत।
  • इस वर्ष 15 सितंबर (मंगलवार) को मनाई जाएगी ऋषि पंचमी।
  • व्रत के दौरान हल से जुता अन्न खाने की सख्त मनाही; केवल सांवा (तिन्नी/पसाई के चावल) और कंद-मूल खाने का नियम।
  • सप्तऋषियों की आराधना और अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित का माना जाता है महापर्व।

नई दिल्ली / धर्म डेस्क।
सनातन धर्म में भाद्रपद शुक्ल पंचमी का दिन आत्मशुद्धि, कृतज्ञता और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन मनाए जाने वाले इस पर्व को 'ऋषि पंचमी' के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष ऋषि पंचमी का व्रत 15 सितंबर 2026 (मंगलवार) को रखा जाएगा।

इस दिन विशेष रूप से सप्तऋषियों (कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ) के साथ देवी अरुंधती की पूजा की जाती है। ऋषि पंचमी व्रत का सबसे प्रमुख और कड़ा नियम यह है कि इस दिन हल से जोतकर उगाए गए किसी भी अन्न (जैसे गेहूं, धान आदि) का सेवन नहीं किया जाता है।

तिथि और शुभ मुहूर्त

  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 15 सितंबर 2026, सुबह 07:44 बजे से
  • पंचमी तिथि समाप्त: 16 सितंबर 2026, सुबह 08:59 बजे तक
  • सप्तऋषि पूजन मुहूर्त: सुबह 11:07 बजे से दोपहर 01:33 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 26 मिनट)

हल से जुता हुआ अन्न क्यों नहीं खाते?

शास्त्रों और पौराणिक परंपराओं के अनुसार, इस नियम के पीछे दो प्रमुख कारण हैं:

1. अहिंसा और जीव हत्या से बचाव का संकल्प

ऋषि पंचमी का व्रत पूरी तरह से प्रायश्चित, शुद्धि और अहिंसा पर आधारित है। जब खेत में हल चलाया जाता है, तो जमीन के नीचे रहने वाले असंख्य सूक्ष्म जीव, केंचुए और कीड़े-मकोड़े अनजाने में कटकर मर जाते हैं। इस दिन किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हिंसा के दोष से बचने के लिए हल से जुती भूमि पर उपजा अन्न ग्रहण नहीं किया जाता।

2. ऋषि-मुनियों की सात्विक जीवनशैली का अनुकरण

प्राचीन काल में ऋषि-मुनि जंगलों और आश्रमों में रहते हुए बिना जुताई के प्रकृति द्वारा स्वतः उगने वाले कंद-मूल, फल और जंगली धान्य ही ग्रहण करते थे। ऋषि पंचमी पर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी तपस्वी जीवनशैली को एक दिन के लिए जीने के उद्देश्य से व्रती केवल वही चीजें खाते हैं जो बिना जुताई के प्राकृतिक रूप से पैदा होती हैं।

इस दिन क्या खाया जाता है?

ऋषि पंचमी के व्रत में केवल वही चीजें खाई जाती हैं जिन्हें उगाने के लिए धरती पर हल या ट्रैक्टर नहीं चलाया गया हो:

  • तिन्नी या पसाई के चावल (सांवा / समा के चावल): यह तालाबों, पोखरों और जंगलों में बिना जुताई के अपने आप उगते हैं।
  • कंद-मूल और जंगली सब्जियां: जैसे अरबी, रतालू, सूरन (जिमीकंद) और बिना हल की सहायता से उगने वाले फल।
  • सेंधा नमक और गाय का दूध/घी: भोजन में सादे नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है।

क्या है ऋषि पंचमी की धार्मिक मान्यता?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत मुख्य रूप से जाने-अनजाने में हुए शारीरिक, मानसिक व स्पर्श संबंधी दोषों (विशेषकर महिलाओं द्वारा मासिक धर्म के दौरान अनजाने में हुए धार्मिक नियमों के उल्लंघन) से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है।

मान्यता है कि विधि-विधान से सप्तऋषियों का पूजन करने और इस सात्विक व्रत का पालन करने से व्यक्ति के सभी कायिक व वाचिक पाप धुल जाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा व आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।