कजरी तीज की पूजा में न छूटे कोई सामग्री: अखंड सौभाग्य और मनचाहे वर के लिए रखा जाता है व्रत; नोट करें पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट

धर्म डेस्क.भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज (कजली तीज या सातुड़ी तीज) का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखद दांपत्य जीवन के लिए निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित युवतियां भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए श्रद्धाभाव से यह व्रत करती हैं।
शास्त्रों के अनुसार, कजरी तीज की पूजा में विधि-विधान और संपूर्ण पूजन सामग्री का विशेष महत्व होता है। पूजा के समय कोई भी आवश्यक सामग्री छूट न जाए, इसलिए समय रहते पूरी लिस्ट तैयार कर लेना जरूरी है।
कजरी तीज: पूजा सामग्री की पूरी चेकलिस्ट
1. स्थापना एवं मुख्य पूजन सामग्री:
प्रतिमा/चित्र: भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर।
मिट्टी का शिवलिंग: यदि घर में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर पूजन करना हो।
पूजन थाली व कलश: साफ पीतल या तांबे की थाली, जल से भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल।
पवित्र जल: गंगाजल या शुद्ध जल का पात्र।
केले के पत्ते व कच्चा सूत: वेदी सजाने और परिक्रमा के लिए।
2. अभिषेक एवं अर्पण सामग्री:
पंचामृत: दूध, दही, देसी घी, शहद और शक्कर का मिश्रण।
रोली, कुमकुम, चंदन, हल्दी और अक्षत (बिना टूटे हुए चावल)।
सुपारी और पान के पत्ते।
धूप, अगरबत्ती, कपूर और घी/तेल का दीपक।
फूल-माला: विशेषकर बेलपत्र, शमी पत्र, दूर्वा, सफेद और पीले फूल।
3. भोग एवं नैवेद्य:
ऋतु फल: केला, अनार, सेब, अमरूद आदि मौसमी फल।
पारंपरिक मिष्ठान: मालपुआ, सत्तू, खीर या बेसन के लड्डू।
अन्न: पूजन में अर्पित करने के लिए गेहूं या चने का आटा।
4. माता पार्वती के लिए 16 श्रृंगार सामग्री:
लाल चुनरी, सिंदूर, बिंदी, कांच की चूड़ियां/कंगन, काजल, मेहंदी, महावर (आलता), कंघी, बिछिया और इत्र।
5. अन्य आवश्यक सामग्री:
कजरी तीज व्रत कथा की पुस्तक।
दक्षिणा (लाल या पीले कपड़े में लपेटकर)।
नीम की डाली (नीमड़ी माता के पूजन के लिए, परंपरा के अनुसार)।
क्यों मनाई जाती है कजरी तीज?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी निष्ठा और अटूट तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। यही कारण है कि कजरी तीज को दांपत्य प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
क्या है इसका धार्मिक महत्व?
इस पावन दिन पर भगवान शिव और माता पार्वती के साथ-साथ कई क्षेत्रों में नीमड़ी माता की पूजा का भी विधान है। महिलाएं सोलह श्रृंगार करके समूह में व्रत कथा सुनती हैं और कजरी लोकगीत गाती हैं। वर्षा ऋतु में आने वाला यह पर्व न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि लोकसंस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव का भी एक बड़ा माध्यम है।
