🔴 Latest
🔴 हल षष्ठी (ललही छठ) 2026: संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का महापर्व 2 सितंबर को, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के कड़े नियम🔴 उत्तराखंड में अंतर-धार्मिक विवाह और निकाह के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, UCC पोर्टल पर अनिवार्य होगा ‘पंजीकृत निकाहनामा’🔴 राहुल गांधी की 'बुद्धि शुद्धि' के लिए भाजपा ने किया हवन-यज्ञ, सकारात्मक राजनीति करने की दी सलाह🔴 उत्तराखंड में जनगणना का आगाज: 4 जिलों के हिमाच्छादित क्षेत्रों में आज से सर्वे, प्रशासन बोला— कोई नहीं मांगेगा वित्तीय जानकारी🔴 ऋषि पंचमी कब? जानिए इस दिन क्यों नहीं खाया जाता हल से जुता हुआ अन्न, क्या है इसके पीछे की पौराणिक मान्यता🔴 हल षष्ठी (ललही छठ) 2026: संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का महापर्व 2 सितंबर को, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के कड़े नियम🔴 उत्तराखंड में अंतर-धार्मिक विवाह और निकाह के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, UCC पोर्टल पर अनिवार्य होगा ‘पंजीकृत निकाहनामा’🔴 राहुल गांधी की 'बुद्धि शुद्धि' के लिए भाजपा ने किया हवन-यज्ञ, सकारात्मक राजनीति करने की दी सलाह🔴 उत्तराखंड में जनगणना का आगाज: 4 जिलों के हिमाच्छादित क्षेत्रों में आज से सर्वे, प्रशासन बोला— कोई नहीं मांगेगा वित्तीय जानकारी🔴 ऋषि पंचमी कब? जानिए इस दिन क्यों नहीं खाया जाता हल से जुता हुआ अन्न, क्या है इसके पीछे की पौराणिक मान्यता
Home /dharma

दरभंगा का 105 साल पुराना चमत्कारी हनुमान मंदिर: मन्नत पूरी होने पर भक्त चढ़ाते हैं 'चांदी की आंखें'

1 September 2026

AI News Reader

खबर सुनें (Listen Now)

दरभंगा का 105 साल पुराना चमत्कारी हनुमान मंदिर: मन्नत पूरी होने पर भक्त चढ़ाते हैं 'चांदी की आंखें'


बिहार की सांस्कृतिक नगरी दरभंगा में स्थित करीब 105 साल पुराना एक सिद्ध हनुमान मंदिर आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। साल 1920 में घने जंगलों के बीच महज 3 फीट की जगह में स्थापित बजरंगबली की एक छोटी सी प्रतिमा से शुरू हुआ यह सफर आज एक विशाल और भव्य धाम का रूप ले चुका है। इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि मनोकामना पूरी होने पर भक्त यहाँ बजरंगबली को 'चांदी की आंखें' भेंट करते हैं।

1920 में जंगल के बीच हुई थी शुरुआत

मंदिर के पुजारियों और स्थानीय जानकारों के अनुसार, करीब एक सदी पहले यह पूरा क्षेत्र सुनसान और घने जंगलों से घिरा हुआ था। सन् 1920 के आसपास यहाँ एक स्कूल भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ।

निर्माण कार्य निर्विघ्न और सकुशल पूरा हो सके, इसके लिए ठेकेदार ने श्रद्धाभाव से वहाँ हनुमान जी की एक छोटी सी प्रतिमा स्थापित कर दी थी। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि जंगल के बीच 3 फीट की जगह में बना यह छोटा सा थान आने वाले समय में मिथिलांचल और बिहार के सबसे प्रतिष्ठित आस्था केंद्रों में शुमार हो जाएगा।

मन्नत पूरी होने पर 'चांदी की आंखें' चढ़ाने की अनोखी परंपरा

इस मंदिर की सबसे अलग और खास बात यहाँ का चढ़ावा है। मान्यता है कि जो भी भक्त यहाँ सच्चे मन और निष्कपट भाव से सिर झुकाता है, हनुमान जी उसकी हर जायज मुराद पूरी करते हैं।

जब किसी श्रद्धालु की कोई बड़ी मनोकामना पूर्ण होती है, तो वह अपनी श्रद्धा से मंदिर के जीर्णोद्धार में संगमरमर, टाइल्स या अन्य निर्माण सामग्री का योगदान देता है। लेकिन यहाँ दशकों से चली आ रही सबसे प्रमुख परंपरा 'चांदी की आंखें' चढ़ाने की है। कष्टों और बीमारियों से मुक्ति मिलने पर भक्तजन भगवान को चांदी की आंखें अर्पित कर आभार जताते हैं।

राम दरबार और शिव मंदिर का विस्तार

जैसे-जैसे भक्तों की मुरादें पूरी होती गईं, वैसे-वैसे मंदिर का स्वरूप भी भव्य होता चला गया:

राम दरबार की स्थापना: श्रद्धालुओं के सहयोग से हनुमान जी के विग्रह के साथ-साथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी की मूर्तियां स्थापित कर भव्य 'राम दरबार' बनाया गया।

शिवालय का निर्माण: मंदिर प्रांगण में ही भगवान शिव का एक नयनाभिराम मंदिर भी बनवाया गया।

शांत और स्वच्छ वातावरण: आज इस पूरे परिसर में स्वच्छता और आध्यात्मिक शांति का ऐसा माहौल रहता है कि यहाँ कदम रखते ही श्रद्धालुओं को मानसिक सुकून का अनुभव होता है।

मंगलवार और शनिवार को उमड़ता है आस्था का सैलाब

मंदिर के मुख्य पुजारी बताते हैं कि बजरंगबली के दर से कोई खाली हाथ नहीं जाता। लोग अपनी गंभीर बीमारियों, पारिवारिक क्लेश, कोर्ट-कचहरी और मानसिक परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए दूर-दूर से यहाँ आते हैं।

सप्ताह के दो दिन—मंगलवार और शनिवार—को मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। तड़के सुबह से ही मंदिर के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं। दिनभर चलने वाले भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा के स्वरों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है।

डिस्क्लेमर: इस समाचार में दी गई जानकारी और मान्यताएं स्थानीय पुजारियों, श्रद्धालुओं और जनश्रुतियों पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक जानकारी को साझा करना है।