उत्तरकाशी के सीमांत गांवों में बिजली संकट का स्थायी समाधान

उत्तरकाशी: उत्तरकाशी के भटवाड़ी विकासखंड स्थित दूरस्थ पिलंग और जौड़ाऊ गांव के ग्रामीणों को अब हर साल बारिश और कड़ाके की बर्फबारी में अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा। दोनों गांवों को ऑफ-ग्रिड सौर ऊर्जा संयंत्र (सोलर पावर प्लांट) से जोड़ दिया गया है। एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से 'प्रज्ञा' संस्था द्वारा स्थापित कुल 102 किलोवाट क्षमता की इस सौर ऊर्जा परियोजना का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है।
इस परियोजना से दोनों गांवों के 113 परिवारों के साथ-साथ पंचायत घरों और सरकारी स्कूलों को भी 24 घंटे बिजली की सुविधा मिलेगी।
किस गांव को कितनी क्षमता का प्लांट मिला?
परियोजना के तहत दोनों गांवों में अलग-अलग क्षमता के सोलर प्लांट और उनका अपना स्वतंत्र विद्युत वितरण नेटवर्क तैयार किया गया है:
पिलंग गांव: यहां 67 किलोवाट का सोलर प्लांट स्थापित कर 78 परिवारों को कनेक्शन दिए गए हैं।
जौड़ाऊ गांव: यहां 35 किलोवाट क्षमता का प्लांट लगाया गया है, जिससे 35 परिवार लाभान्वित होंगे।
ठंड में गर्म पानी की भी व्यवस्था: 1000 लीटर के वाटर हीटर लगे
ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतों और भीषण ठंड को ध्यान में रखते हुए दोनों गांवों में 1000-1000 लीटर क्षमता के दो-दो सोलर वाटर हीटर (गीजर) भी लगाए गए हैं। इससे ग्रामीणों को कड़ाके की ठंड में गर्म पानी के लिए लकड़ी और अन्य पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
संचालन की जिम्मेदारी अब ग्राम पंचायतों के हाथ
संस्था ने सौर ऊर्जा संयंत्रों और वितरण प्रणाली का निर्माण पूरा करने के बाद इसका पूरा संचालन स्थानीय ग्राम पंचायतों को सौंप दिया है। शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान ग्राम प्रधान दीपा राणा, अनिता, आशुतोष, भूषण शाह और विजयपाल राणा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
खराब मौसम में भी नहीं टूटेगी बिजली की सप्लाई
संस्था के प्रतिनिधि मनमोहन सिंह ने बताया कि सीमांत क्षेत्र होने के कारण मानसून में भूस्खलन और सर्दियों में भारी बर्फबारी के चलते मुख्य ग्रिड की बिजली लाइनें अक्सर टूट जाती हैं। कई बार ग्रामीणों को हफ्तों अंधेरे में गुजारने पड़ते थे।
उन्होंने बताया कि यह ऑफ-ग्रिड सिस्टम स्वतंत्र रूप से काम करेगा, जिससे मुख्य लाइन ठप होने पर भी गांवों में घरेलू और सामुदायिक स्तर पर जरूरी कार्यों के लिए बिजली की निर्बाध सप्लाई जारी रहेगी।
