हरिद्वार: जिला जज के नाम पर फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, मुकदमा दर्ज

हरिद्वार:
उत्तराखंड के हरिद्वार में साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे आम लोगों के साथ-साथ न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचक रहे हैं। ताजा मामला हरिद्वार के जिला जज (District Judge) से जुड़ा है, जहां एक अज्ञात जालसाज ने उनकी प्रोफाइल फोटो लगाकर फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाया और लोगों से पैसों की मांग शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिडकुल कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अपर जिला जज (ADJ) ने दिए स्क्रीनशॉट, कोर्ट प्रशासन ने दर्ज कराई शिकायत
घटना का खुलासा तब हुआ जब अपर जिला जज (लक्सर) की ओर से कुछ संदिग्ध व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट न्यायालय प्रशासन को उपलब्ध कराए गए। इन चैट में एक अज्ञात नंबर पर जिला जज की फोटो लगी हुई थी और उसी नंबर से लोगों से पैसों की डिमांड की जा रही थी।
जांच में पुष्टि हुई कि यह नंबर न तो जिला जज का है और न ही उनकी तरफ से किसी को ऐसा कोई संदेश भेजा गया है। इसके बाद जिला न्यायालय के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की ओर से पूरे मामले की लिखित तहरीर सिडकुल कोतवाली पुलिस को दी गई।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच में जुटी पुलिस
तहरीर और स्क्रीनशॉट मिलने के बाद सिडकुल पुलिस ने संबंधित साइबर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की साइबर सेल टीम उस मोबाइल नंबर, चैट हिस्ट्री, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर आरोपी तक पहुंचने में जुटी है।
"मामले में तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। डिजिटल साक्ष्यों की गहनता से जांच की जा रही है ताकि आरोपी की लोकेशन और पहचान का पता लगाया जा सके। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
— अजय शाह, प्रभारी निरीक्षक, सिडकुल कोतवाली
पहले पूर्व SSP के नाम पर भी बन चुका है फर्जी अकाउंट
जिले में किसी बड़े अधिकारी के नाम पर ठगी की कोशिश का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी हरिद्वार के पूर्व एसएसपी (SSP) की फोटो लगाकर फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया गया था और परिचितों से पैसों की मांग की गई थी। अब जिला जज के नाम का इस्तेमाल किए जाने से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अधिकारी या प्रतिष्ठित व्यक्ति के नाम से आने वाले संदिग्ध मैसेज या पैसों की मांग पर भरोसा न करें और तत्काल साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
