आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित होगा 'ऋषिकुल': CM धामी ने की मास्टर प्लान की समीक्षा; 2 साल में काम पूरा करने का अल्टीमेटम

देहरादून | हरिद्वार स्थित ऐतिहासिक 'पंडित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, ऋषिकुल' को अब आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में नया स्वरूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में संस्थान के समग्र विकास को लेकर तैयार किए गए मास्टर प्लान की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में संस्थान के भावी स्वरूप, शैक्षणिक ढांचे और मेडिकल टूरिज्म की रूपरेखा पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तय समय-सीमा के तहत चरणबद्ध तरीके से अगले दो साल के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि ऋषिकुल को इस तरह विकसित किया जाए कि यह प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक शोध के बीच एक प्रभावी सेतु (Bridge) का काम करे।
मास्टर प्लान की 5 बड़ी बातें:
- पारंपरिक वास्तुशिल्प और आधुनिक सुविधाएं: भवनों के बाहरी फसाड (Facade) में प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला दिखेगी, जबकि अंदर की व्यवस्थाएं अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय होंगी।
- 2 साल की समय-सीमा: परियोजना के सभी चरणों के लिए स्पष्ट डेडलाइन तय होगी, जिसकी नियमित समीक्षा शासन स्तर पर की जाएगी।
- प्रमुख फोकस क्षेत्र: आयुर्वेद, योग-ध्यान, वैदिक गणित, ज्योतिष और समग्र स्वास्थ्य (Wellness)।
- ग्लोबल मेडिकल टूरिज्म: मां गंगा की नगरी हरिद्वार आने वाले देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को आयुर्वेदिक चिकित्सा और आध्यात्मिक शांति का अनुभव मिलेगा।
- ज्ञान परंपरा का प्रसार: प्राच्य विद्याओं और पांडुलिपि शोध के साथ-साथ युवाओं के लिए उच्च स्तरीय शैक्षणिक वातावरण तैयार होगा।
प्राचीनता और आधुनिकता का संतुलित समन्वय
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्थान के भौतिक ढांचे पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा:
"ऋषिकुल परिसर का वास्तुशिल्प प्राच्य एवं पारंपरिक स्थापत्य शैली के अनुरूप होना चाहिए। यहां आने वाले हर व्यक्ति को भारतीय संस्कृति, ज्ञान और सनातन अध्यात्म की जीवंत अनुभूति हो। भवनों का बाहरी स्वरूप हमारी प्राचीन स्थापत्य परंपरा को दर्शाए, लेकिन भीतर शोधकर्ताओं, छात्रों और पर्यटकों को आधुनिकतम तकनीक व सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। प्राचीनता और आधुनिकता के संतुलन से ही ऋषिकुल की विशिष्ट पहचान बनेगी।"
आयुर्वेद, ज्योतिष और वैदिक गणित पर उच्च स्तरीय शोध
मास्टर प्लान के अनुसार, संस्थान केवल एक दर्शनीय स्थल नहीं, बल्कि अध्ययन और अनुसंधान का बड़ा केंद्र बनेगा। इसके तहत:
- वैदिक गणित और ज्योतिष: भारतीय गणितीय परंपरा और खगोल/ज्योतिष विद्या पर उच्च स्तरीय शैक्षणिक पाठ्यक्रम और शोध पीठ स्थापित की जाएंगी।
- समग्र स्वास्थ्य और मेडिकल टूरिज्म: ऋषिकुल को आयुर्वेद और वेलनेस का प्रमुख केंद्र बनाकर वैश्विक मेडिकल टूरिज्म से जोड़ा जाएगा।
- योग एवं ध्यान केंद्र: मानसिक शांति और शारीरिक आरोग्य के लिए आधुनिक योग एवं ध्यान (Meditation) परिसरों का विकास होगा।
- पांडुलिपि और शास्त्रीय अध्ययन: प्राचीन ग्रंथों, दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और अनुवाद के लिए उत्कृष्ट शोध वातावरण तैयार किया जाएगा।
हरिद्वार के वैश्विक और आध्यात्मिक महत्व से जुड़ेगा परिसर
सीएम धामी ने कहा कि हरिद्वार पतित पावनी मां गंगा के कारण विश्वभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था का केंद्र है। हर वर्ष करोड़ों लोग हरिद्वार पहुंचते हैं। इसलिए ऋषिकुल के मास्टर प्लान में हरिद्वार के इस आध्यात्मिक महत्व को केंद्र में रखा गया है। यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों और देशी तीर्थयात्रियों को भारतीय ज्ञान, दर्शन और समग्र जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से देखने, समझने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा।
अधिकारियों को निर्देश: 'काम की गति धीमी न पड़े, तय करें चरण'
मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मास्टर प्लान की सभी योजनाओं के लिए स्पष्ट चरण और कार्ययोजना (Action Plan) बनाई जाए।
- निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता न हो।
- कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनेगी।
- दो साल के भीतर परियोजना के मुख्य घटकों को धरातल पर उतारकर जनता व शोधार्थियों के लिए समर्पित करने का लक्ष्य रखा गया है।
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