नंदा देवी बड़ी जात: 5 सितंबर से शुरू होगी मां नंदा की 280 किमी की महायात्रा, सुंग गांव का दुर्लभ 'चौसिंग्या खाडू' बनेगा कैलाश का मार्गदर्शक

चमोली (उत्तराखंड)। उत्तराखंड की लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक 'नंदा देवी बड़ी जात' आगामी 5 सितंबर से सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर से विधिवत शुरू होने जा रही है। 12 वर्षों के अंतराल पर होने वाली इस ऐतिहासिक और कठिन 280 किलोमीटर लंबी पदयात्रा में सुंग गांव (चमोली) के रमेश सिंह बिष्ट का 8 माह का 'चौसिंग्या खाडू' (चार सींगों वाला मेढ़ा) मां नंदा के कैलाश जाने का मुख्य मार्गदर्शक और देवरथ बनेगा।
गौरतलब है कि इससे पूर्व वर्ष 2014 में आयोजित जात के दौरान भी सुंग गांव के ही केदार सिंह बिष्ट का चौसिंग्या खाडू मां नंदा का देवरथ बना था।
चीन सीमा स्थित बुग्याल में चरकर लौटा दुर्लभ खाडू
सुंग गांव के ग्राम प्रधान तीरथ सिंह बिष्ट ने बताया कि जैसे ही रमेश सिंह के यहां इस चार सींगों वाले दुर्लभ मेढ़े का जन्म हुआ था, उन्होंने इसे मां नंदा की पवित्र जात के लिए समर्पित कर दिया था।
बीते तीन महीनों से यह खाडू चीन सीमा से सटे उच्च हिमालयी लपथल बुग्याल में चरान के लिए गया हुआ था, जिसे 28 अगस्त को वापस सुंग गांव लाया गया। परंपरा के अनुसार, आगामी 3 सितंबर को इस चौसिंग्या खाडू को विधि-विधान के साथ सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर ले जाया जाएगा और 5 सितंबर को यह मां नंदा की डोली के आगे-आगे कैलाश के लिए प्रस्थान करेगा।
आस्था की अनूठी परंपरा: होमकुंड में अकेला विदा होता है खाडू
हिमालयी परंपरा में चौसिंग्या खाडू को मां नंदा का शुभदूत और संदेशवाहक माना जाता है। लगभग 280 किलोमीटर लंबी इस बेहद कठिन यात्रा में यह मेढ़ा मां नंदा की डोली और भक्तों के सबसे आगे चलता है।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु खाडू की पीठ पर ओढ़ाए गए विशेष वस्त्र पर मां नंदा के लिए चुनरी, श्रृंगार सामग्री, वस्त्र, आभूषण और स्थानीय पकवान बांधते हैं। यात्रा के अंतिम दुर्गम पड़ाव होमकुंड (लगभग 17,500 फीट) पर पहुंचकर विशेष पूजा के बाद इस खाडू को समस्त सामग्री सहित कैलाश की ओर अकेला विदा कर दिया जाता है, जहां यह हिमशिखरों में आगे बढ़कर अंततः विलीन हो जाता है।
नंदा देवी बड़ी जात 2026: प्रमुख पड़ाव और कार्यक्रम
5 सितंबर: सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर से नंदा देवी बड़ी जात का औपचारिक प्रस्थान।
12 सितंबर: जात रामणी गांव पहुंचेगी; यहां फरस्वाण फाट के जाख देवता, त्यूणा रचकोटी, दशमद्वार काली, बंड, लाता और बदरीनाथ की डोलियों व छंतोलियों का महामिलन होगा।
15 सितंबर: आला, सितेल, कनोल होते हुए जात लाटू देवता के प्रसिद्ध मंदिर वाण पहुंचेगी।
18 सितंबर: रणकधार और गैरोली पातल से गुजरते हुए जात वेदनी बुग्याल पहुंचेगी, जहां सप्तमी की विशेष पूजा होगी।
19 सितंबर: बगुवावासा, पातर नचौणियां, कैलवा विनायक, रूपकुंड और ज्योंरागली दर्रा पार कर शिलासमुद्र पहुंचेगी।
20 सितंबर: होमकुंड में मां नंदा की महापूजा, चौसिंग्या खाडू की कैलाश विदाई और रात्रि प्रवास के लिए जामुनडाली वापसी।
21 से 29 सितंबर: वापसी यात्रा (सुतोल, पैरी, सितेल, गुलाड़ी, नारंगी, फरखेत पड़ाव)।
30 सितंबर: मां नंदा की डोली की सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में पुनः स्थापना और जात का पूर्णाहुति समापन।
तैयारियां अंतिम चरण में, मुख्यमंत्री को दिया न्योता
जात समिति के अध्यक्ष कर्नल (सेनि) हरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि बड़ी जात के सफल संचालन के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। उन्होंने बताया:
"मां नंदा की बड़ी जात के शुभारंभ के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री को विधिवत न्योता भेजा गया है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों, बुग्यालों और दुर्गम पड़ावों पर यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, टेंट और राशन व्यवस्था के लिए शासन-प्रशासन से पुख्ता इंतजाम करने का आग्रह किया गया है।"
— कर्नल (सेनि) हरेंद्र सिंह रावत, अध्यक्ष, नंदा बड़ी जात समिति (कुरुड़, चमोली)
