कालीमठ मंदिर में सुविधाओं का टोटा: हक-हकूकधारियों ने खोला BKTC के खिलाफ मोर्चा

रुद्रप्रयाग : उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ कालीमठ मंदिर में देश-प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और वीवीआईपी हस्तियों की आमद के बावजूद जमीनी हालात बदहाल हैं। मंदिर क्षेत्र में पक्की सड़कें, शौचालय, तीर्थयात्रियों के ठहरने के इंतजाम और सुगम आवाजाही जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है। इसको लेकर कालीमठ मंदिर समूह से जुड़े पंचगाईं क्षेत्र के हक-हकूकधारियों ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
कालीमठ पंचगाईं समिति के अध्यक्ष लखपत राणा के नेतृत्व में बीकेटीसी सदस्य प्रह्लाद पुष्पाण के जरिए 12 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया है। समिति ने बीकेटीसी में स्थायी सदस्यता, मंदिर परिसर में कार्यालय और देवरा यात्रा के लिए सरकारी बजट समेत कई अहम मांगें रखी हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि संवाद से समाधान नहीं निकला तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
विवाद और मांगों की 4 बड़ी बातें:
- बुनियादी सुविधाओं का अभाव: वीआईपी मूवमेंट के बावजूद सड़क, शौचालय और धर्मशाला जैसी सुविधाओं से महरूम है कालीमठ धाम।
- BKTC में स्थायी हिस्सेदारी: पंचगाईं क्षेत्र के हक-हकूकधारियों ने मंदिर समिति के बोर्ड और उपसमितियों में स्थायी प्रतिनिधित्व मांगा।
- चार साल में निकलने वाली देवरा यात्रा: मां कालीमाई की देवरा यात्रा के लिए सालाना सरकारी बजट और 2026-2027 यात्रा के लिए प्रोटोकॉल की मांग।
- स्थानीय को रोजगार में प्राथमिकता: मंदिर क्षेत्र में व्यवसाय और नौकरियों में स्थानीय निवासियों को तवज्जो देने की अपील।
'सदियों से सेवा दे रहे, अब नीतिगत निर्णयों में भागीदारी जरूरी'
पंचगाईं समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने कहा कि पंचगाईं के हक-हकूकधारी पीढ़ियों से कालीमठ, कालीशिला और संबद्ध मंदिरों की धार्मिक व्यवस्था और सेवा संभालते आ रहे हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन द्वारा उनके अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समिति ने मांग की है कि:
- मंदिर से जुड़े किसी भी बड़े नीतिगत निर्णय में पंचगाईं समिति से औपचारिक राय ली जाए।
- कालीमठ मंदिर परिसर में समिति के संचालन के लिए एक कार्यालय कक्ष आवंटित किया जाए।
- धार्मिक आयोजनों में समिति पदाधिकारियों की आधिकारिक सहभागिता तय हो और प्राचीन दस्तावेजों का संरक्षण किया जाए।
मां कालीमाई की देवरा यात्रा के लिए बजट और प्रोटोकॉल की मांग
समिति ने चार साल के अंतराल में निकलने वाली मां कालीमाई की भव्य देवरा यात्रा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यह महज धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान केदारनाथ की अधिष्ठात्री शक्ति मां काली से जुड़ी दिव्य परंपरा है।
समिति ने मांग की कि यात्रा की तैयारियों के लिए राज्य सरकार हर साल बजट आवंटित करे। इसके अलावा वर्ष 2026 में प्रस्तावित श्री केदारनाथ धाम और वर्ष 2027 में श्री बदरीनाथ धाम में देवरा यात्रा पहुंचने पर विशेष स्वागत और प्रशासनिक प्रोटोकॉल दिया जाए।
दुर्घटना पर मुआवजे और स्थानीय रोजगार का मुद्दा
समिति ने बीकेटीसी के अंतर्गत आने वाले मंदिरों में दर्शन, रोजगार और व्यापार में पंचगाईं क्षेत्र के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही मंदिर सेवा के दौरान किसी हक-हकूकधारी की दुर्घटना या मृत्यु होने पर उसके परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा देने का नियम बनाने की मांग उठाई।
अधिकारियों का पक्ष:
"कालीमठ पंचगाईं समिति की मांगों को लेकर पदाधिकारियों के साथ जल्द औपचारिक बैठक की जाएगी। जिन बिंदुओं पर सहमति बनेगी, उन पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। बीकेटीसी कालीमठ मंदिर के समग्र विकास के लिए धरातल पर लगातार कार्य कर रही है।"
— विजय कप्रवाण, उपाध्यक्ष, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC)
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