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राजाजी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी फुल डे सफारी: हर गेट से दो वाहन, सूर्योदय से सूर्यास्त तक जंगल में रहेंगे पर्यटक

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom19 September 2026

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राजाजी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी फुल डे सफारी: हर गेट से दो वाहन, सूर्योदय से सूर्यास्त तक जंगल में रहेंगे पर्यटक

देहरादून। उत्तराखंड में वन्यजीव पर्यटन को नई दिशा देने की तैयारी है। राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन फुल डे सफारी का प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसके तहत पर्यटक सूर्योदय से सूर्यास्त तक जंगल में रह सकेंगे। अभी प्रदेश के किसी भी संरक्षित क्षेत्र में इस तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

प्रस्ताव के मुताबिक हर गेट से केवल दो वाहनों को पूरे दिन की सफारी की अनुमति दी जाएगी। इसका शुल्क मौजूदा सफारी से अधिक रखा जाएगा, हालांकि दर अभी तय नहीं हुई है। वाहनों की संख्या सीमित रखने के पीछे मकसद यह है कि जंगल पर दबाव न बढ़े और वन्यजीवों की दिनचर्या प्रभावित न हो।

चार गेट से मिलेगी सुविधा

राजाजी टाइगर रिजर्व में फिलहाल चिल्ला, मोतीचूर, चीलावाली और रानीपुर गेट से सफारी संचालित होती है। वर्तमान में दिन में दो पाली — सुबह और शाम — में सफारी कराई जाती है और हर पाली की अवधि चार घंटे रहती है। हर पाली में वाहनों की संख्या भी निर्धारित है। बीते वर्षों में पर्यटन बढ़ाने के लिए यहां कई नए जोन भी खोले गए हैं।

रिजर्व की निदेशक कोको रोज ने बताया कि मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ और कान्हा जैसे टाइगर रिजर्व में फुल डे सफारी संचालित होती है और उसी तर्ज पर यहां भी यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। पर्यटक सुबह सूर्योदय के समय जंगल में प्रवेश करेंगे और सूर्यास्त तक भ्रमण कर सकेंगे।

हर साल बढ़ रहे सफारी करने वाले पर्यटक

प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन लगातार लोकप्रिय हो रहा है। आंकड़े बताते हैं कि सफारी करने वाले पर्यटकों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है —

  • वर्ष 2022-23 में 6,58,613 पर्यटक
  • वर्ष 2023-24 में 7,17,939 पर्यटक
  • वर्ष 2024-25 में 8,08,324 पर्यटक

फुल डे सफारी का प्रस्ताव मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने और शुल्क तय होने के बाद अगले पर्यटन सत्र की शुरुआत से इसे लागू करने की योजना है।

माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से वन्यजीव प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफी करने वालों को जंगल को नजदीक से समझने के लिए अधिक समय मिलेगा। चार घंटे की सीमित पाली में अक्सर पर्यटक जंगल के भीतरी हिस्सों तक नहीं पहुंच पाते, जबकि पूरे दिन की सफारी में यह संभव हो सकेगा।