देहरादून के आउटर इलाकों में जहरीले सांपों का खतरा बढ़ा, 8 महीने में 542 का रेस्क्यू; 112 जहरीले

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शहर के लगातार फैलते दायरे के बीच इंसानों और सांपों के बीच टकराव का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है। खासकर शहर के बाहरी और जंगल से सटे इलाकों में जहरीले सांपों की मौजूदगी चिंता बढ़ा रही है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से 13 सितंबर 2026 तक देहरादून वन प्रभाग में कुल 542 सांपों का रेस्क्यू किया गया, जिनमें 112 जहरीली प्रजातियों के सांप शामिल हैं।
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार रेस्क्यू किए गए 542 सांपों में सबसे अधिक संख्या गैर-जहरीले सांपों की रही। 230 रैट स्नेक रेस्क्यू किए गए, जो कुल संख्या का करीब 42 प्रतिशत हैं। इसके अलावा 109 वाटर स्नेक, 59 ट्रिंकेट स्नेक, 18 बफ स्ट्राइप्ड कीलबैक, 8 पायथन और 4 कैट स्नेक रेस्क्यू किए गए।
वहीं, जहरीली प्रजातियों की बात करें तो कुल 112 जहरीले सांप रेस्क्यू किए गए। इनमें 62 कोबरा, 41 कॉमन करैत, 6 सिंध करैत, 2 रसेल वाइपर और 1 किंग कोबरा शामिल हैं। यानी उपलब्ध रेस्क्यू आंकड़ों में करीब 21 प्रतिशत सांप जहरीले थे।
आउटर इलाकों में क्यों बढ़ रहा खतरा?
वन विभाग के मुताबिक देहरादून के बालावाला, मोथरोवाला, बढ़ोवाला, नथुवाला और एफआरआई के पीछे के इलाकों समेत शहर के बाहरी हिस्सों में जहरीले सांपों की मौजूदगी सामने आई है। इन क्षेत्रों में तेजी से निर्माण कार्य हो रहा है और कई इलाके जंगल, नदी-नालों तथा प्राकृतिक क्षेत्रों के करीब हैं।
डीएफओ देहरादून वैभव कुमार सिंह के मुताबिक, उपलब्ध रेस्क्यू आंकड़ों में बाहरी क्षेत्रों से जहरीले सांपों की मौजूदगी सामने आ रही है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि जहरीले सांप केवल आउटर इलाकों में ही पाए जाते हैं।
बारिश के बाद उमस और तापमान में बदलाव के दौरान सांप अपने ठिकानों से बाहर निकलते हैं। वहीं, शहर के बाहरी इलाकों में बढ़ते निर्माण के कारण प्राकृतिक आवास और मानव आबादी के बीच दूरी कम हो रही है, जिससे सांपों के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है।
बारिश में बढ़ जाती हैं रेस्क्यू कॉल
वन विभाग के अनुसार बरसात के दौरान सांपों के रेस्क्यू की कॉल में बढ़ोतरी होती है। कई दिनों में 10 से 15 सांपों तक का रेस्क्यू करने की स्थिति बन जाती है। देहरादून शहर में चार टीमें काम कर रही हैं, जबकि वन प्रभाग के कर्मचारी भी रेस्क्यू अभियान में जुटे रहते हैं।
रेस्क्यू किए गए सांपों के कर्मचारीवार आंकड़ों में सुदर्शन पंवार ने 265 सांप, प्रवेश कुमार ने 131, अरशद आलम ने 81 और जितेंद्र बिष्ट ने 65 सांप रेस्क्यू किए। कुल 542 रेस्क्यू में अकेले सुदर्शन पंवार के हिस्से में करीब आधे मामले आते हैं।
सांप दिखाई दे तो खुद पकड़ने या मारने की कोशिश न करें
वन विभाग का कहना है कि आम लोगों के लिए सांपों की प्रजातियों की सही पहचान करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में किसी भी सांप को देखकर उसे पकड़ने या मारने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि सांप दिखाई देने पर टोल फ्री नंबर 1926 पर सूचना दें। खासकर जंगल, नदी-नालों और प्राकृतिक क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
वन विभाग के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि देहरादून में सांपों का रेस्क्यू लगातार एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। गैर-जहरीले सांपों की संख्या अधिक होने के बावजूद कोबरा और कॉमन करैत जैसी जहरीली प्रजातियों की मौजूदगी लोगों के लिए अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत को रेखांकित करती है।
