बदरीनाथ धाम में 'देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल' पर बवाल: पुरोहित बोले- 'जहां शंख बजाना भी मना, वहां तेज संगीत का शोर क्यों?'

चमोली (उत्तराखंड): बदरीनाथ धाम के अराइवल प्लाजा में आयोजित दो दिवसीय ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत और ज्योतिर्मठ ने धार्मिक स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के स्वरूप और तेज संगीत पर कड़ी नाराजगी जताई है। विवाद बढ़ने के बाद कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाली प्रसिद्ध गायिका प्रियंका महर और लोक गायक किशन महिपाल को सोशल मीडिया पर भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर गायिका प्रियंका महर को लेकर यूजर्स नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
वहीं, तीर्थ पुरोहितों और संतों ने मुख्यमंत्री से मामले में सीधे हस्तक्षेप की मांग की है।
मामले से जुड़ी 3 बड़ी बातें
- विवाद की वजह: सेना और जिला प्रशासन द्वारा बदरीनाथ धाम के अराइवल प्लाजा में आयोजित कार्यक्रम के प्रस्तुतिकरण और तेज ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउड म्यूजिक) के उपयोग पर आपत्ति।
- विरोध करने वाले: चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत, ज्योतिर्मठ के संत स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरी और स्थानीय विधायक लखपत बुटोला।
- मांग: बदरीनाथ धाम की आध्यात्मिक मर्यादा और पर्यावरण को देखते हुए भविष्य में ऐसे आयोजनों को रोकने के लिए ठोस नीति बने।
तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने कहा- 'उद्देश्य पर नहीं, प्रस्तुति के तरीके पर ऐतराज'
चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा कि बदरीनाथ धाम देश के चार प्रमुख धामों में सर्वोच्च स्थान रखता है। महापंचायत को कार्यक्रम के उद्देश्य से कोई समस्या नहीं है, लेकिन जिस तरह से मंच पर तेज संगीत और प्रस्तुति दी गई, वह धाम की गरिमा के प्रतिकूल है।
डॉ. सती ने कहा, "बदरीनाथ धाम की धार्मिक और पौराणिक परंपराएं सर्वोपरि हैं। धाम में तेज संगीत और शोर मचाना धार्मिक मर्यादा का सीधा उल्लंघन है। साथ ही हिमालयी क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण के गंभीर पर्यावरणीय दुष्प्रभाव भी होते हैं। कपाट खुलने से पहले भी इस तरह के आयोजन हुए थे। शासन-प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।"
ज्योतिर्मठ के संत बोले- तपस्या भंग करने जैसा कृत्य, CM दखल दें
ज्योतिर्मठ के स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरी महाराज ने भी इस आयोजन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से धार्मिक मर्यादाओं के उल्लंघन पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की।
स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने कहा, "बदरीकाश्रम साक्षात ऋषि-मुनियों और भगवान नर-नारायण की पवित्र तपस्थली है। मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान की एकाग्रता और तपस्या में कोई विघ्न न पड़े, इसलिए शंख बजाना तक वर्जित माना गया है। ऐसे पावन स्थल पर सांस्कृतिक उत्सव के नाम पर शोर-शराबा करना धार्मिक परंपराओं के साथ खिलवाड़ है।"
बदरीनाथ के स्थानीय विधायक लखपत बुटोला ने भी तीर्थ पुरोहितों और संतों के रुख का समर्थन करते हुए धाम की मर्यादा बनाए रखने की बात कही है।
TV10 INDIA एक्सप्लेनर: बदरीनाथ धाम में शंख बजाना क्यों वर्जित है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बदरीनाथ धाम क्षेत्र में भगवान विष्णु के अवतार नर और नारायण निरंतर ध्यान और तपस्या में लीन रहते हैं। उनकी ध्यान-साधना में कोई रुकावट न आए, इसलिए मंदिर परिसर और आसपास शंख ध्वनि पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा एक पौराणिक कथा यह भी है कि जब देवी लक्ष्मी बदरी वृक्ष के रूप में तपस्या कर रही थीं, तब उनकी शांति बनाए रखने के लिए यहां शंखनाद निषेध किया गया था। यही वजह है कि पुरोहित समाज आधुनिक वाद्य यंत्रों और तेज लाउडस्पीकर के प्रयोग को धाम की मूल परंपरा के खिलाफ मान रहा है।
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