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उत्तराखंड में नंदा महोत्सव की धूम: अल्मोड़ा और नैनीताल में उमड़ा आस्था का सैलाब, विधि-विधान से हुई मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom19 September 2026

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उत्तराखंड में नंदा महोत्सव की धूम: अल्मोड़ा और नैनीताल में उमड़ा आस्था का सैलाब, विधि-विधान से हुई मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा
23 सितंबर को नैनीताल में निकलेगा भव्य डोला, नैनी झील में विसर्जन के साथ होगी मां की भावुक विदाई; अल्मोड़ा के 400 वर्ष पुराने ऐतिहासिक मंदिर में दर्शन को लगीं लंबी कतारें।

नैनीताल/अल्मोड़ा:
उत्तराखंड के दोनों मंडलों—गढ़वाल और कुमाऊं में इन दिनों लोक आस्था के महापर्व 'मां नंदा महोत्सव' की जबरदस्त धूम है। गढ़वाल के चमोली में जहां प्रसिद्ध 'बड़ी जात' चल रही है, वहीं कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा और नैनीताल में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। शनिवार को नंदाष्टमी के पावन अवसर पर अल्मोड़ा के ऐतिहासिक नंदा देवी मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा, वहीं नैनीताल के प्रसिद्ध मां नयना देवी मंदिर में मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं की पूरे विधि-विधान व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ प्राण प्रतिष्ठा की गई।

नयना देवी मंदिर में विराजीं मां, तड़के 3 बजे से कतारों में खड़े रहे भक्त

कुमाऊं की कुलदेवी मां नंदा-सुनंदा अपने मायके यानी कुमाऊं की पावन धरा पर विराजमान हो चुकी हैं। नैनीताल के नयना देवी मंदिर में प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा होते ही पूरा वातावरण 'मां नंदा-सुनंदा' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। तड़के तीन बजे से ही दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए। भक्तों ने मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

23 सितंबर को निकलेगा भव्य डोला, नैनी झील में होगा विसर्जन

नैनीताल में इस नंदा महोत्सव का मुख्य आकर्षण 23 सितंबर को निकलने वाला मां नंदा-सुनंदा का भव्य डोला होगा। इस दिन मां की प्रतिमाओं को गाजे-बाजे और पारंपरिक छोलिया नृत्य के साथ नगर भ्रमण कराया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। नगर भ्रमण के बाद प्रतिमाओं को नैनी झील में विसर्जित किया जाएगा। कुमाऊंनी लोक परंपरा में इस विसर्जन को मां नंदा की मायके से ससुराल (कैलाश) की भावुक विदाई के रूप में मनाया जाता है।

अल्मोड़ा: 400 साल पुराने ऐतिहासिक मेले में आस्था का महाकुंभ

सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा के ऐतिहासिक नंदा देवी मंदिर में भी नंदाष्टमी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर परिसर पूरे दिन भक्तों की आवाजाही से गुलजार रहा।

उल्लेखनीय है कि अल्मोड़ा के नंदा देवी मेले का इतिहास करीब 400 वर्ष पुराना है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, चंद राजवंश के शासनकाल में मां नंदा की मूर्ति नगर के मल्ला महल में स्थापित थी। बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर जीडब्ल्यू ट्रेल ने मूर्तियों को वहां से स्थानांतरित कर चंद राजाओं द्वारा निर्मित 'उद्योत चंद्रेश्वर शिव मंदिर' में स्थापित कराया, जिसके बाद यह परिसर 'नंदा देवी मंदिर' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

कदली वृक्षों से तैयार होती हैं दिव्य प्रतिमाएं

मेले की धार्मिक परंपरा बेहद अनूठी है। षष्ठी तिथि के दिन विधि-विधान के साथ कदली वृक्षों (केले के तनों) को मां की प्रतिमा निर्माण के लिए निमंत्रित किया जाता है। सप्तमी को कदली खामों को गाजे-बाजे के साथ मंदिर परिसर में लाया जाता है, जहां स्थानीय कलाकार पूरी पवित्रता और पारंपरिक शैली में मां नंदा-सुनंदा की भव्य और मनोहारी प्रतिमाएं तैयार करते हैं।

मां के आगमन से लेकर विदाई तक समूचा कुमाऊं अंचल भक्ति, लोक संस्कृति और पारंपरिक उल्लास के रंग में रंगा नजर आ रहा है।


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