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वैज्ञानिकों ने खोजा इंसानों का 49वां ब्लड ग्रुप, दुर्लभ मरीजों के लिए सुरक्षित होगा रक्त चढ़ाना

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom20 September 2026

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वैज्ञानिकों ने खोजा इंसानों का 49वां ब्लड ग्रुप, दुर्लभ मरीजों के लिए सुरक्षित होगा रक्त चढ़ाना

लंदन। वैज्ञानिकों ने इंसानों में एक नए ब्लड ग्रुप की पहचान की है। इसे जामा नाम दिया गया है, जो जंक्शनल एडहेजन मॉलिक्यूल-ए का संक्षिप्त रूप है। यह मनुष्यों में पहचाना गया 49वां ब्लड ग्रुप है।

यह खोज ब्रिटेन और इजरायल के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने की है। इसमें ब्रिटेन की रक्त एवं प्रत्यारोपण सेवा तथा इजरायल के प्रमुख अस्पताल शामिल रहे। अंतरराष्ट्रीय रक्त आधान समिति ने इस ब्लड ग्रुप को मान्यता दे दी है।

एक दुर्लभ एंटीबॉडी से मिला सुराग

इस खोज की शुरुआत तब हुई जब इजरायल की एक महिला मरीज के रक्त प्लाज्मा में एक दुर्लभ एंटीबॉडी मिली। बाद में उनके भाई के रक्त में भी वही विशेषता पाई गई। दोनों में एफ11आर जीन की विशिष्ट बनावट थी और सामान्य रूप से पाया जाने वाला एंटीजन अनुपस्थित था।

वैज्ञानिकों ने एफ11आर जीन और जेएएम-ए प्रोटीन की पूरी आनुवंशिक तथा सीरोलॉजिकल मैपिंग की। इसके बाद उन्होंने डीएनए में हुए उस बदलाव को ठीक-ठीक चिह्नित किया, जिसकी वजह से यह स्थिति बनती है। इसी अध्ययन ने नए ब्लड ग्रुप की पुष्टि की।

क्यों अहम है यह खोज

जेएएम-ए एक ऐसा एंटीजन है जो लगभग हर व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स पर मौजूद रहता है। जिन दुर्लभ लोगों में यह अनुपस्थित होता है, उन्हें सामान्य रक्त चढ़ाने पर जानलेवा ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन हो सकता है।

अब डीएनए जांच की मदद से ऐसे मरीजों और रक्तदाताओं की पहचान पहले ही की जा सकेगी, जिनमें यह एंटीजन नहीं होता। इससे उन्हें सही मिलान वाला रक्त उपलब्ध कराना संभव होगा और रक्त आधान कहीं अधिक सुरक्षित हो सकेगा।

दुनिया भर में रक्त आधान के दौरान होने वाली जटिलताओं की एक बड़ी वजह रक्त समूहों का बारीक अंतर होता है। ए, बी, ओ और आरएच जैसे जाने-पहचाने समूहों के अलावा दर्जनों ऐसी प्रणालियां हैं जो सामान्य जांच में सामने नहीं आतीं। हर नए ब्लड ग्रुप की पहचान ऐसे दुर्लभ मामलों को समझने और उनका सुरक्षित इलाज करने में मदद करती है।