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नंगे पांव प्रचार करने वाले दीपांशु शौकीन बने डूसू उपाध्यक्ष, निर्दलीय उम्मीदवार ने रचा इतिहास

tv10 india news desk
By tv10 india news deskNewsroom20 September 2026

AI News Reader

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नंगे पांव प्रचार करने वाले दीपांशु शौकीन बने डूसू उपाध्यक्ष, निर्दलीय उम्मीदवार ने रचा इतिहास

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में इस बार सबसे चर्चित चेहरा रहे निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। करीब सोलह-सत्रह साल बाद किसी निर्दलीय उम्मीदवार ने छात्रसंघ में कोई पद जीता है।

दीपांशु दिल्ली के पीरागढ़ी गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता बस कंडक्टर हैं और मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई भगत सिंह कॉलेज से की और इस समय दिल्ली विश्वविद्यालय में बौद्ध अध्ययन की पढ़ाई कर रहे हैं।

प्रचार से मतगणना तक नंगे पांव

सत्य निकेतन में हुए एक हादसे के बाद दीपांशु ने छात्रों से जुड़े सवालों पर न्याय मिलने तक जूते-चप्पल न पहनने का संकल्प लिया था। उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान यह संकल्प निभाया और मतगणना केंद्र तक नंगे पांव ही पहुंचे। यही बात उन्हें बाकी उम्मीदवारों से अलग करती रही और परिसर में चर्चा का विषय बनी रही।

दीपांशु ने एनएसयूआई से टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। नाम वापस लेने के दबाव के बावजूद वह मैदान में डटे रहे और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

नतीजों में उन्होंने एबीवीपी की ईशु मौर्य को 13,705 मतों के अंतर से हराया। इसी सीट पर एनएसयूआई के वीर छत्राथ को 4,313 मत मिले, जो नोटा को मिले 4,359 मतों से भी कम रहे।

बाकी तीन पदों पर एबीवीपी

  • अध्यक्ष पद पर यश डबास को 24,576 और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 22,523 मत मिले
  • सचिव पद पर रिया छाबड़ी को 21,650 और प्रतिद्वंद्वी को 14,869 मत मिले
  • संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह को 16,615 और प्रतिद्वंद्वी को 15,778 मत मिले

मतगणना सुबह आठ बजे शुरू हुई और बीस चरणों में पूरी हुई। नतीजे शाम करीब चार बजे घोषित किए गए। दिनभर मतगणना केंद्र के बाहर छात्रों की भीड़ जमा रही।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में आमतौर पर बड़े छात्र संगठनों का ही दबदबा रहता है। संसाधनों और संगठन के मामले में निर्दलीय उम्मीदवार उनके सामने कहीं नहीं ठहरते। ऐसे में एक साधारण परिवार से आने वाले छात्र की यह जीत इस चुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण बन गई।