लाइक्स के बाजार में नीलाम होता 'सुकून'

सुनीत द्विवेदी
एडिटर
TV10 INDIA
दुनियाभर की सरकारों के पास 'जीडीपी' नापने के पैमाने हैं। लेकिन, इंसान के पास अपनी 'मुस्कान' नापने का कोई मीटर नहीं है। विडंबना देखिए, जिस 'खुशी' के लिए हम जीवन भर की पूंजी दांव पर लगा देते हैं, उसे हमने फिनलैंड और डेनमार्क के इंडेक्स की फाइलों में कैद कर दिया है।
20 मार्च को अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस है। कैलेंडर का ऐसा दिन, जिसे हमने एक खास भावना के नाम कर दिया है। लेकिन, क्या खुशियां सच में तारीखों की मोहताज होती हैं? शायद नहीं। क्योंकि असली चुनौती बाहर की दुनिया में 'खुशी' ढूंढने की नहीं, बल्कि उस मानसिक अवरोध को तोड़ने की है। जो हमें यह यकीन दिलाता है कि खुशी, किसी बाहरी उपलब्धि का परिणाम है।
अक्सर हम फिनलैंड या डेनमार्क जैसे देशों के 'हैप्पीनेस इंडेक्स' को ललचाई नजरों से देखते हैं। हम सोचते हैं कि वहां की प्रति व्यक्ति आय या सामाजिक सुरक्षा ही सुख का पैमाना है। बेशक, सुविधाएं जीवन को सुगम बनाती है। पर वे आनंद की गारंटी नहीं हैं।
खुशी किसी मंज़िल का नाम नहीं है। बल्कि उस सफर के दौरान आपके 'नजरिए' का नाम है।
अक्सर हम उन चीजों के पीछे भागते हैं। जो 'दिखने' में सुखद हैं। पर 'महसूस' करने में खोखली हैं।संघर्ष ही सुख की नींव है।
सोचिए, क्या पर्वतारोही शिखर पर पहुंचकर खुश होता है? शायद हां, लेकिन उसकी वास्तविक खुशी उन पथरीले रास्तों और हाड़ कंपा देने वाली हवाओं से लड़ने में थी। "सुख का अर्थ समस्याओं का अभाव नहीं, बल्कि उन समस्याओं से जूझने का आपका सामर्थ्य है।"
जब आप किसी मुश्किल काम को हाथ में लेते हैं। उसे पूरा करते हैं। ऐसे में जो 'डोपामाइन रश' आपको मिलता है। वह किसी भी कृत्रिम मनोरंजन से बड़ा होता है। असली खुशी विश्राम में नहीं, सार्थक श्रम में है।
आज हमने अपनी 'खुशियों का रिमोट' सोशल मीडिया के 'लाइक्स' और 'कमेंट्स' को दे दिया है। हम दूसरों की सजी-धजी जिंदगी देखकर अपनी सादगी से नफरत करने लगते हैं। यकीन मानिए, यह तुलना ही प्रसन्नता की सबसे बड़ी 'दुश्मन' है।
खुशी कोई 'मंजिल' नहीं है। जिसे जीपीएस लगाकर ढूंढा जा सके। यह 'मांसपेशी' की तरह है। जिसे हर दिन अभ्यास से मजबूत करना पड़ता है। अगर आप भीतर से हार गए, तो पूरी दुनिया की दौलत भी आपको वह सुकून नहीं दे पाएगी। जो एक गहरी, सच्ची सांस में छिपी है।
असंभव के विरुद्ध लड़ने का सबसे बड़ा हथियार आपकी वह मुस्कान है, जिसे दुनिया का कोई इंडेक्स कम नहीं कर सकता। लेकिन, अगर आप अपनी मुस्कान के लिए दूसरों के 'लाइक' के मोहताज हैं, तो यकीन मानिए दुनिया में आपसे ज्यादा गरीब व्यक्ति कोई नहीं है।
