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लंपी वायरस की आहट से सरकार अलर्ट: पशुओं के अंतर्राज्यीय परिवहन और प्रदर्शनियों पर एक महीने की रोक, टीकाकरण तेज

26 August 2026

AI News Reader

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लंपी वायरस की आहट से सरकार अलर्ट: पशुओं के अंतर्राज्यीय परिवहन और प्रदर्शनियों पर एक महीने की रोक, टीकाकरण तेज

देहरादून: पड़ोसी राज्यों में लंपी रोग (Lumpy Skin Disease) के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेश सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। गोवंशीय (गाय) और महिषवंशीय (भैंस) पशुओं में संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। इसके तहत एक से दूसरे जिले तथा अन्य राज्यों से पशुओं के परिवहन (आवाजाही) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। वहीं, बीमारी की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग द्वारा टीकाकरण अभियान को युद्ध स्तर पर तेज कर दिया गया है।

पशु प्रदर्शनियों और जमावड़े पर 1 महीने का प्रतिबंध

विभागीय सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य में अगले एक महीने तक गोवंशीय और महिषवंशीय पशुओं की किसी भी प्रकार की प्रदर्शनी, पशु मेलों और उन्हें एकत्र किए जाने से जुड़ी सभी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने यह एडवाइजरी जारी की है। गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों में लंपी रोग तेजी से पैर पसार रहा है, जिसे देखते हुए राज्य की सीमाओं और जिलों में विशेष चौकसी बरती जा रही है।

12 सैंपल जांच के लिए भेजे गए, मृत्यु दर 1-2 प्रतिशत

पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. उदय शंकर ने बताया कि कुछ पशुओं में लंपी रोग के प्राथमिक लक्षण दिखाई देने पर 12 सैंपल एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

उन्होंने रोग के संबंध में जानकारी देते हुए बताया:

  • लक्षण: इस रोग से ग्रसित पशुओं के पूरे शरीर पर गांठें/दाने (Nodules) उभर आते हैं और उन्हें तेज बुखार होता है।
  • फैलने का कारण: यह संक्रमण मुख्यतः मच्छर, मक्खी और किलनी (चिचड़ी) के काटने से एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है।
  • मृत्यु दर कम: रोग से घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसमें मृत्यु दर मात्र 1 से 2 प्रतिशत ही है।
  • सतत टीकाकरण: विभाग द्वारा पिछले तीन वर्षों से इस रोग के नियंत्रण के लिए लगातार टीकाकरण किया जा रहा है।

पशुपालकों के लिए जरूरी सावधानियां

पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से सतर्कता बरतने की अपील करते हुए निम्नलिखित उपाय अपनाने की सलाह दी है:

  1. कीटनाशक का छिड़काव: पशुशाला और उसके आसपास मच्छर-मक्खियों को पनपने से रोकने के लिए नियमित रूप से कीटनाशक का छिड़काव करें।
  2. बीमार पशु को अलग रखें: यदि किसी पशु में दाने या बुखार के लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग (आइसोलेट) कर दें।
  3. स्वच्छता का ध्यान: पशु बाड़े में साफ-सफाई और सूखे स्थान की व्यवस्था रखें।
  4. तत्काल सूचना दें: किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय या डॉक्टर से संपर्क करें।