GDP डेटा विवाद पर वर्ल्ड बैंक के डायरेक्टर का दो टूक जवाब: '2.6% विकास दर का दावा सच्चाई से कोसों दूर'

- वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने जीडीपी आंकड़ों पर उठाए जा रहे सवालों को सिरे से खारिज किया।
- पूर्व वित्त सचिव एस. सी. गर्ग के 'वास्तविक ग्रोथ 2.6%' वाले दावे को बताया सच्चाई से कोसों दूर।
- कहा- फरवरी 2026 की नई डेटा सीरीज से गणना और ज्यादा पारदर्शी हुई, मार्च से ही सबको थी जानकारी।
- ऑटो सेल्स, बंपर टैक्स कलेक्शन और क्रेडिट ग्रोथ जैसे जमीनी आंकड़े दे रहे अर्थव्यवस्था की मजबूती की गवाही।
नई दिल्ली:
भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर खड़े किए जा रहे सवालों और विवादों पर वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने उन तमाम दावों को 'पूरी तरह निराधार और अज्ञानता से भरा' करार दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की विकास दर 7.8 प्रतिशत नहीं, बल्कि केवल 2.6 प्रतिशत रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए मिश्रा ने कहा कि आर्थिक आंकड़ों में हेरफेर के आरोप सच्चाई से कोसों दूर हैं और देश की जमीनी अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद पर खड़ी है।
विवाद की जड़: पूर्व वित्त सचिव ने क्या दावा किया था?
यह पूरा विवाद पूर्व वित्त सचिव एस. सी. गर्ग के उस बयान के बाद गरमाया था, जिसमें उन्होंने सरकार के जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाए थे। गर्ग का तर्क था कि पिछले साल के जीडीपी बेस में संशोधन कर उसे कम दिखाया गया, जिसकी वजह से इस बार ग्रोथ रेट 7.8% दिखाई दे रही है। यदि पुराने बेस से गणना की जाए, तो वास्तविक विकास दर महज 2.6% ही बैठती है।
'नई डेटा सीरीज ने आंकड़ों को बनाया और अधिक पारदर्शी'
नीलकंठ मिश्रा ने इन दावों को तकनीकी रूप से खारिज करते हुए स्पष्ट किया:
- डेटा में सुधार: फरवरी 2026 में लागू की गई नई डेटा सीरीज ने गणना की प्रक्रिया को पहले से अधिक सटीक, साफ और पारदर्शी बना दिया है।
- पहले से थी जानकारी: जो विशेषज्ञ और अर्थशास्त्री इस क्षेत्र को बारीकी से ट्रैक करते हैं, उन्हें मार्च में ही इन बदलावों की पूरी जानकारी थी। ऐसे में अचानक आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाना पूरी तरह बेबुनियाद है।
जमीन पर दिख रही है मजबूती: ये आंकड़े हैं गवाह
मिश्रा ने कहा कि कुछ लोग भ्रामक जानकारियों को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि अर्थव्यवस्था के असली इंडिकेटर्स को न तो बदला जा सकता है और न ही छुपाया जा सकता है। उन्होंने भारत की रफ्तार के समर्थन में कई ठोस आंकड़े पेश किए:
- पैसेंजर गाड़ियां: अगस्त महीने में कारों और एसयूवी (SUVs) की घरेलू बिक्री में सालाना आधार पर 35% का बंपर उछाल दर्ज किया गया।
- कमर्शियल व टू-व्हीलर: कमर्शियल वाहनों की बिक्री में 40% से अधिक और दोपहिया वाहनों की बिक्री में 20% से ज्यादा की तेजी आई है।
- टैक्स और बैंक क्रेडिट: सरकार का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर संग्रह तेजी से बढ़ा है, वहीं बैंकों से कर्ज वितरण (क्रेडिट ग्रोथ) में भी उम्मीद से बेहतर उछाल देखा जा रहा है।
7% से ऊपर बनी रहेगी भारत की विकास दर
वर्ल्ड बैंक अधिकारी का मानना है कि कर्ज मिलने की बाधाएं दूर होने और आर्थिक मोर्चे पर आ रही अड़चनों के समाप्त होने से अर्थव्यवस्था लगातार रफ्तार पकड़ रही है। आने वाले समय में देश की औसत विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की पूरी संभावना है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि प्राइवेट सेक्टर में निवेश कम होने की बातें अब गलत साबित हो चुकी हैं, क्योंकि बाजार में निजी पूंजीगत व्यय (Private Capex) स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। हालांकि, उन्होंने माना कि मजदूरी (वेतन) की सुस्त रफ्तार जैसी कुछ चुनौतियां अभी बनी हुई हैं, जिन्हें पूरी तरह पटरी पर आने में थोड़ा वक्त लग सकता है।
